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मौत के बाद भी नहीं पसीजते `भगवान`

Badaun

Updated Thu, 11 Oct 2012 12:00 PM IST
बदायूं। कल रात की मैय्यत है...पूरा दिन यहीं गुजर गया... न जाने कब पोस्टमार्टम होगा... फिर कब दफन करेंगे। अस्पताल के कई चक्कर लगा चुके हैं लेकिन डॉक्टरों ने सुध नहीं ली। दिन ढलने को आ गया है, अब डीएम से शिकायत करने के अलावा कोई चारा नहीं। शायद यही सोचकर शफी अहमद अपने रिश्तेदारों और परिवार के लोगों के साथ डीएम आवास का रुख कर गया।
बुधवार की शाम 4.45 बज चुके थे, लेकिन पोस्टमार्टम हाउस पर डॉक्टर और पुलिस लाइन के फार्मासिस्ट नहीं पहुंचे। जबकि वहां एक नहीं दो लाशें पोस्टमार्टम के लिए लाई जा चुकी थीं। इनमें एक कोतवाली बिसौली क्षेत्र से आई जली हुई विवाहिता रानी बी थी तो दूसरी लाश जिला कारागार के बंदी सरबुद्दीन की।
बंदी के परिजन को जेल प्रशासन की ओर से मंगलवार की रात ढाई बजे मौत की खबर पहुंचाई गई थी, पूरी रात आंखों में काट दी। सुबह लाश देखी तो उन्हें लगा कि जेल में प्रताड़ित किए जाने की वजह से सरबुद्दीन की जान गई है। हालांकि पोस्टमार्टम न होने की वजह से इस आरोप की पुष्टि नहीं हो सकी थी।

दो डॉक्टरों की थी ड्यूटी
पोस्टमार्टम हाउस पर जिला अस्पताल में तैनात डा. आरके सिंह और आंख, कान, नाक और गला रोग विशेषज्ञ डॉ. आरएस सिद्दीकी की ड्यूटी थी। दो डॉक्टरों की ड्यूटी इसलिए लगाई गई थी क्योंकि सरबुद्दीन का पोस्टमार्टम पैनल से होना था लेकिन दिन ढलने तक दोनों में से कोई डॉक्टर वहां नहीं पहुंचा।

स्वास्थ्य विभाग से उम्मीद बेइमानी

मंगलवार की दोपहर मेरी बहन रानी बी की जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हुई थी। पहले कागज बनवाने में भटकते रहे। आज दूसरे दिन दोपहर पंचनामा भरवाकर यहां लाए, तो डॉक्टर गायब हैं। जो स्वास्थ्य महकमा मुर्दों को इंतजार कराने से नहीं चूकता उससे जिंदा लोगों के इलाज की उम्मीद बेमानी है। नसरे आलम, आंवला, बरेली

साजिश हो रही

मेरे भाई की जेल में प्रताड़ना मिलने से मौत हुई है। न्याय की आस में सुबह से भटक रहे हैं लेकिन कोई नहीं सुन रहा। अब पोस्टमार्टम करने से डॉक्टर कतरा रहे हैं। मुझे यह सब साजिश लग रहा है।
शफी अहमद, बंदी का भाई


डॉक्टर आरके सिंह जेल अस्पताल का चार्ज भी संभाल रहे हैं। फिलहाल वह जेल में हैं। जेल अधीक्षक से कहिए कि उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेजें। मेरे पास होते तो मैं दोनों को ड्यूटी पर भेज देता।
डॉ. नरेंद्र कुमार, सीएमएस
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