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ये अस्पताल है या कबूतरखाना

Badaun

Updated Wed, 03 Oct 2012 12:00 PM IST
बदायूं। ककराला का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अस्पताल कम कबूतरखाना अधिक नजर आता है। यहां छत पर कबूतर और मुर्गियों के दड़बे बने हैं और नीचे बकरियां पाली जा रही है। चिकित्सकों के आवास भी बने हैं, मगर इनमें भरा है भूसा। अस्पताल के तमाम उपकरण खराब पड़े हैं। इस हाल में मरीजों को एक्स-रे की सुविधा भी नहीं मिल पा रही। दवाएं भी नहीं हैं। तीस बेड वाले ककराला अस्पताल की हालत दयनीय है। हर साल इसकी रंगाई-पुताई होनी चाहिए, लेकिन कराई नहीं जाती। एंबुलेंस परिसर में खड़ी जंग खा रही है, बेड टूटे पड़े हैं।
कुछ ऐसा ही हाल अस्पताल से मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का है। कहने को यहां 18 लोगों का स्टाफ तैनात है, मगर इनमें से अधिकतर रोज नहीं पहुंचते। रोगी आते हैं, मगर इन्हें बुखार और उल्दी-दस्त जैसे रोगों की दवाएं भी बाजार से ही लेनी पड़ती है। इस हाल में मरीज यहां भर्ती होने से कतराते हैं।
अस्पताल की छत पर बड़ी मात्रा में कबूतर और मुर्गे पालने को दड़बे बने है। ये पक्षी अस्पताल में काम करने वालों ने ही पाल रखे हैं। सफाई होती नहीं सो दूसरी मंजिल इन पक्षियों की गंदगी से पटी पड़ी है। यहां के जिम्मेदार अधिकारियों को इस सबकी कोई परवाह ही नहीं।
परिसर में ही चिकित्सकों के लिए आवास भी बने हैं, मगर इनका उपयोग भूसा रखने के लिए ही होता है। इन आवासों के आस पास ही बकरियों के लिए बाड़े भी बने हैं । विभाग के अफसर हर माह अस्पताल में निरीक्षण को जाते हैं, लेकिन उन्हें जैसे यह सब कुछ दिखाई ही नहीं देता।
वर्जन----
अस्पताल आवास में रहने वाले लोग शौकिया तौर पर छत पर पक्षी पाले हुए हैं। यह हटवा दिए जाएंगे। खराब उपकरण भी ठीक करवाए जा रहे हैं और दवाएं भी मिल गई हैं। -फिरासत हुसैन, प्रभारी चिकित्साधिकारी, सीएचसी ककराला

गांव के अस्पतालों में नहीं मिलती दवाएं

बदायूं। अब ग्रामीण इलाकों के स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाओं का कमी होने से मरीजों को वापस लौटना पड़ रहा है। स्थानीय स्तर से दवाएं खरीदी नहीं जा रही हैं। इस हाल में मरीज प्राइवेट चिकित्सकों के यहां दौड़ लगा रहे हैं।
जिले में सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या 19 है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार हर केंद्र पर प्रतिदिन 150 से 200 मरीज आते हैं। इन मरीजों पर चार से पांच हजार टेबलेट खर्च होती हैं, लेकिन वर्तमान में बुखार, उल्दी-दस्त की दवाओं का टोटा है। एंटीबायोटिक दवाएं भी नहीं मिल रही हैं। सूत्रों का कहना है कि विभाग के खाते में दवा खरीद के लिए 30 लाख रुपये हैं। महकमे के अफसर कंपनियों से संपर्क करने की कोशिश में लगे हैं ताकि स्थानीय बजट की बचत हो सके। अलापुर, जगत, समरेर, म्याऊ, दहगवां, वजीरगंज, सैदपुर, बिसौली आदि केंद्रों पर दवाएं कम पहुंच रही हैं।
सीएमओ डॉ. रजनीश पाल सिंह का कहना है कि दवाएं सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर भेजी जा रही हैं। कुछ दवाएं कम थी जो मंगवा ली गई हैं।
जिला अस्पताल में आई दवाएं
जिला अस्पताल में चल रहा दवाओं का टोटा कुछ कम हुआ है। मंगलवार को पैरासिटामोल, निमुसुलाइड, एंटीबायोटिक दवाएं विभिन्न कंपनियों से सप्लाई की। कुछ दवाएं अस्पताल प्रशासन ने लोकल खरीदी।
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