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58 हजार महिलाओं को घर पर हुए बच्चे

Badaun

Updated Mon, 17 Sep 2012 12:00 PM IST
बदायूं। वर्ष 2011-12 में जिले की 58845 महिलाओं को घर पर बच्चे पैदा हुए। इन गर्भवती महिलाओं का भी प्रसव स्वास्थ्य केंद्रों पर होना था। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के जच्चा-बच्चा सुरक्षा अभियान को इससे झटका लगा है। कुल लक्ष्य का 60 फीसदी विभाग ने पूरा करने का दावा किया है, लेकिन सूत्र इन आंकड़ों को कागजी बता रहे हैं। क्योंकि कर्मचारियों ने गर्भवती के चयन के लिए गांवों तक दौड़ ही नहीं लगाई। विभाग के अफसरों ने तो ये भी जानने की कोशिश नहीं की कि जो बच्चे घर पर पैदा हुए वह कैसे हैं।
एनआरएचएम के जच्चा-बच्चा सुरक्षा अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं का प्रसव स्वास्थ्य केंद्रों पर कराया जाना था। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के सर्वे के आंकड़े के अनुसार 1,18,845 गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण और प्रसव स्वास्थ्य केंद्रों पर कराने का लक्ष्य मिला था। विभाग ने 60 हजार महिलाओं का प्रसव स्वास्थ्य केंद्रों पर होना दर्शाया है, जबकि आंकड़े कुछ और ही कह रहे हैं।
जिला महिला अस्पताल में जनवरी माह में 411 महिलाओं ने टीकाकरण के लिए पंजीकरण कराया, लेकिन 279 का ही प्रसव अस्पताल में हुआ। इसी तरह फरवरी में 418 में से 288, मार्च में 448 में 311, अप्रैल में 399 में 278, मई में 418 में 321, जून में 370 में 290, जुलाई में 395 महिलाओं में से 288 ने ही अस्पताल में प्रसव कराया। इसके अलावा जिले के 19 प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी प्रसव होने थे, लेकिन वहां के आंकड़े भी लड़खड़ा गए, जो कागजों तक सीमित रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य था कि ग्रामीण इलाकों की गर्भवती महिलाओं का प्रसव स्वास्थ्य केंद्रों पर हो, ताकि जच्चा-बच्चा की सुरक्षा हो सके। इसके लिए ग्रामीण महिलाओं को जागरूक करने के लिए तमाम कार्यक्रम चलाए जाने थे। प्रचार-प्रसार के लिए लाखों रुपये मिले, लेकिन वह कागजों में ही खर्च दिखाए गए। धरातल पर जागरूकता नहीं आई।
फिर छूटने लगा पसीना
इस कार्यक्रम के तहत ही चालू वर्ष में 48 हजार महिलाओं का प्रसव स्वास्थ्य केंद्रों पर करवाने का लक्ष्य मिला है। इसको करने में विभाग को अभी से पसीना छूटने लगा है।
विभाग ने 60 फीसदी लक्ष्य पूरा किया है, जो अन्य जिलों से अच्छा है। कुछ महिलाओं का प्रसव स्वास्थ्य केंद्रों पर इसलिए नहीं हो पाया कि वहां की दूरी गांव से अधिक है, लेकिन जो बच्चे घर पर पैदा हुए वह सुरक्षित हैं।-मनोज कुमार, डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट मैनेजर, एनआरएचएम
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