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हाइवे पर प्रदर्शन कर लगाया जाम

Badaun

Updated Thu, 06 Sep 2012 12:00 PM IST
बदायूं। शहर के गुप्ता मैटरनिटी एवं नर्सिंग होम में प्रसूता की मौत के बाद हुए बवाल ने बुधवार को बड़ा रुप ले लिया। परिजनों ने बरेली-आगरा हाइवे पर प्रदर्शन किया। इस दौरान घंटों जाम लगा रहा। बीच में कुछ वाहन निकालने की कोशिश की गई तो तोड़ फोड़ शुरू हो गई। सूचना पर पहुंचे पुलिस-प्रशासनिक अफसरों को भी जाम खुलवाने को घंटों जूझना पड़ा। प्रदर्शनकारी वरिष्ठ अधिकारियों से जांच कराए जाने का आश्वासन मिलने के बाद ही सड़क से हटने को तैयार हुए। स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों के आदेश पर नर्सिंग होम में संचालित अल्ट्रासाउंड मशीन बंद करा दी गई है। इसके साथ ही पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए इस प्रकरण की जांच एसीएमओ डॉ. प्रभाकर बंधु को सौंपी गई है। वह तीन दिन में जांच कर अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंपेंगे।
शहर के जालंधरी सराय निवासी पंचायती राज विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद तैनात योगेंद्र कुमार की पत्नी रेनू की मंगलवार को डिलीवरी के बाद मौत हो गई थी। इसके बाद घंटों अस्पताल में बवाल हुआ। रात भर पोस्टमार्टम के लिए मशक्कत होती रही, लेकिन नहीं हुआ। मंगलवार की सुबह परिजनों का आक्रोश और बढ़ गया। दिन में लगभग 11 बजे सैकड़ों लोग जिला अस्पताल की मोरचरी में शव लेने पहुंचे। शव पोस्टमार्टम के लिए रिक्शा में ले जाया जा रहा था।परिजनों ने इसको कचहरी पर पर ही रोक कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इससे बरेली-आगरा हाइवे पर जाम लग गया। कुछ ही देर में सड़क पर दोनों ओर वाहनों की लंबी लाइनें दिखाई देने लगीं।
सूचना पर एसओ सिविल लाइन सतीश यादव मय फोर्स के पहुंचे, लेकिन जाम खुलवाने में सफलता नहीं मिली। इसी दौरान एसपी सिटी पियूष श्रीवास्वत और एडीएम प्रशासन संजय कुमार सिंह भी मौके पर पहुंच गए। इन अधिकारियों ने लगभग आधा घंटा परिजनों को समझाया, लेकिन जाम लगाए लोग सड़क से हटने को तैयार नहीं हुए। फोन पर सूचना मिलने पर सीडीओ सूर्यपाल गंगवार और सिटी मजिस्ट्रेट जमीर आलम भी पहुंचे गए। इन अधिकारियों के जाम खोलने के आग्रह पर परिजन ने नर्सिंग होम का लाइसेंस निलंबित करने की मांग ेसामने रख दी। इसी दौरान जाम में फंसे वाहनों को निकालने की कोशिश की गई तो प्रदर्शनकारियों ने तोड़ फोड़ शुरू कर दी। हालात बिगड़ते देख अधिकारियों ने प्रदशर्नकारियों को पूरे मामले की जांच कराकर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद तमाम मुश्किल शव को पोस्टमार्टम हाउस ले जाया जा सका।
अधिक रक्त स्रव से हुई रेनू की मौत
दोपहर लगभग एक बजे रेनू का पोस्टमार्टम हुआ। चिकित्सकों के अनुसार रेनू की मौत की वजह शरीर से अधिक रक्त स्राव होना रही। पोस्टमार्टम के बाद जांच के लिए बिसरा प्रजर्व कर लिया गया है।
लापरवाही बनी बवाल का कारण
परिजन सोमवार की रात को पोस्टमार्टम के लिए कह रहे थे, लेकिन पुलिस ने इसे नहीं स्वीकारा और शव मोरचरी में रखवा दिया। सुबह भी 11 बजे तक पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। इससे परिजनों का गुस्सा बढ़ गया और उन्होंने शव को ले जा रहा रिक्शा सड़क पर रोक कर जाम लगा दिया। इन्हें हटाने की कोशिश की गई तो तोड़फोड़ शुरू हो गई। इस सबके पीछे आधिकारिक स्तर पर बरती गई लापरवाही को कारण माना जा रहा है।
हाइवे पर लेटकर प्रदर्शन
बरेली-आगरा हाइवे लगभग डेढ़ घंटा जाम रहा। मौत से गुस्साए लोगों ने हाइवे पर लेटकर प्रदर्शन किया। पुलिस ने उठाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। प्रदर्शन के दौरान आसपास की फोर्स बुला ली गई। प्रदर्शनकारियों में सबसे अधिक संख्या महिलाओं की रही। इसी कारण पुलिस भी कतराती नजर आई।
डीएम के आने से पहले मामला सुलटाने की कोशिश
नवागत डीएम जीएस प्रियदर्शी को मंगलवार की सुबह चार्ज लेना था। इसी दौरान बवाल हो गया। डीएम की गाड़ी जाम में न फंसे इसके लिए पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने मामला सुलटाने को खूब पसीना बहाया।
मरीज और स्कूली बच्चे फंसे रहे
अलीगढ़ हॉस्पिटल की एंबुलेंस मरीज को लेकर बरेली से आगरा की ओर जा रही थी, लेकिन कचहरी पर जाम के कारण पार नहीं हो पाई। उसको दूसरे रास्ते से निकाला गया। इस दौरान स्कूली बच्चे भी बस, वन में पसीने बहाते रहे। यह वाहन भी नहीं निकल पाए। घंटों बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर कर वाहन निकलवाए।
कन्या भ्रूण हत्या जांच को प्रशासन दबाए बैठा रहा
गुप्ता नर्सिंग होम के संचालकों पर कन्या भ्रूण परीक्षण कर हत्या करने के मामले में वादी एडवोकेट गजेंद्र प्रताप सिंह ने कोर्ट में केस दायर किया था। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच की तो तमाम खामियां मिलीं। प्रथम दृष्टया आरोपी मानते हुए डीएम ने संचालकों को नोटिस जारी किया और जवाब मांगा। जवाब आए लगभग दो माह बीत चुका, लेकिन न तो प्रशासनिक अफसरों ने कार्रवाई की और न स्वास्थ्य महकमे ने। बताते हैं कि संचालकों की राजनीतिक पहुंच के कारण प्रशासन इसमें हाथ नहीं डालना चाह रहा। रेनू के परिजनों का कहना है कि यदि प्रशासन उस मामले में नर्सिंग होम सील कर देता तो उसकी जान न जाती।
अल्ट्रासाउंड का लाइसेंस निलंबित
प्रसूता की मौत के शिकायती पत्र के साथ-साथ दूसरी शिकायत भी मिली है। अस्पताल प्रशासन ने पीएनडीटी एक्ट का भी उल्लंघन किया है। इसलिए उनके अल्ट्रासाउंड का लाइसेंस निलंबित किया गया है। जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई होगी। जांच में वह बिंदु भी शामिल होंगे कि सर्जरी ट्रेंड चिकित्सकों ने की है या नहीं।-सूर्यपाल गंगवार, सीडीओ
चिकित्सक डीएम से मिले
सीएमओ के आदेश जारी होने के बाद आईएमए के पदाधिकारी नवागत डीएम जीएस प्रियदर्शी से मिले। सभी ने जारी आदेश के बारे में बताया तो कि उनके लाइसेंस निलंबित के साथ सर्जरी पर रोक लगाई गई है। डीएम ने तीन अधिकारियों का पैनल गुप्ता नर्सिंग होम भेजा। प्रथम दृष्टया जांच कराई। इसी आधार पर सर्जरी पर लगाई गई रोक हटा ली गई।
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