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... वो शब्द बयां कर रहे अवसाद में थीं चिदर्पिता

Badaun

Updated Sun, 12 Aug 2012 12:00 PM IST
बदायूं। हम सभी कभी न कभी अवसाद का शिकार होते हैं। कभी-कभी यह इतना बढ़ जाता है कि बहुत से लोग आत्महत्या तक का विचार करने लगते हैं। कुछ इस विचार पर विजय पा लेते हैं और कुछ हार मानकर मौत को गले लगा लेते हैं। एक ऐसी खबर देखकर एक बार मेरे बड़े भाई ने कहा था कि जब मन में ऐसा विचार आए तो उन लोगों के बारे में सोचना चाहिए जो आपके मरने से दुखी होंगे। उन सबको जो आपसे प्रेम करते हैं अकारण दुख देना क्रूरता है। आप खुद की नहीं उन सबके प्रेम की हत्या कर रहे हैं और यदि दुर्भाग्य से आपको ऐसा कोई चेहरा ध्यान न आए तो और भी आवश्यक है कि आप जिंदा रहकर अपनी जिंदगी में सुधार लाएं ताकि लोग आपसे प्रेम करें... ये शब्द किसी किताब के नहीं बल्कि छह अगस्त को चिदर्पिता ने फेसबुक पर अपने विचार में दर्ज किए थे। इन्हें पढ़ने के बाद कहा जाए कि चिदर्पिता अवसाद में जी रही थीं तो गलत नहीं होगा।
इस प्रकरण में सही-गलत का निर्णय कोर्ट करेगा लेकिन इस कांड से पहले दोनों के बीच कुछ ऐसा चल रहा था, जिसकी जानकारी केवल इन्हीं को है।
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