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कागज पर ही चल रही बाल कल्याण समिति

Badaun

Updated Sat, 28 Jul 2012 12:00 PM IST
बदायूं। जिस प्रोबेनशन विभाग की बाल कल्याण समिति पर जिले में बेसहारा और मजदूरी कर रहे बच्चों के पुनर्वास का जिम्मा है, उसका जिले में कोई अता-पता ही नही हैं। समिति गठित हुए करीब सालभर हो गया है लेकिन अभी तक न तो समिति को बैठने के लिए दफ्तर मिल सका है और न ही समिति सदस्यों की गतिविधियां सामने आई हैं। ऐसे में इस समिति का संचालन फिलहाल कागजों से बाहर नहीं आ सका है।
ऐसे बच्चों को तादाद अनगिनत है, जिनके सिर पर किसी बड़े का हाथ नहीं है और हालातों के सामने उनके नन्हें पैरों ने घुटने टेक दिए हैं। पेट के लिए कहीं बाल मजदूरी कर तो कहीं खतरनाक पेशों से जुड़ना उनकी मजबूरी बन चुकी है। ऐसे निराश्रित बच्चों को सहारा देने के लिए सरकार ने पिछले साल प्रोबेशन विभाग की बाल कल्याण समिति का गठन किया था, जिसमें अध्यक्ष व सदस्यों को खुद सरकार ने नामित किया है। समिति का दायित्व है कि बाल मजदूरी कर रहे या ऐसे बच्चों को चिन्हित किया जाए, जिन्हें सहारे की जरूरत है और उन्हें संरक्षण के लिए शिशु गृह या बाल गृह में शरण दी जाए। गंभीर बात यह है कि समिति के गठन के बाद तत्कालीन जिला प्रोबेशन अधिकारी ने इस समिति के लिए दफ्तर की तलाश तो शुरू की लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिल सकी। इतना ही नहीं जिला प्राबेशन विभाग अभी तक इन समिति के लिए कार्यालय की व्यवस्था नहीं कर सका है। इसके अलावा इस समिति की कोई गतिविधियां भी सामने नहीं आई हैं और न ही जरूरतमंद बच्चों को चिन्हित करने का काम शुरू हुआ है। ऐसे में यह साफ है कि यह समिति का वजूद सिर्फ कागजों पर ही है। वह अपने मकसद को पूरा करती नहीं नजर आ रही है।

तो कहां जा रहा मीटिंग का बजट
बाल कल्याण समिति को प्रत्येक हफ्ते मीटिंग करने के लिए बैठक का बजट जारी किया जाता है। इधर, अभी तक न तो समिति को दफ्तर ही नहीं मिल सका है और न ही उसकी कोई गतिविधियां शुरू हुई हैं तो ऐसे में मीटिंग को मिलने वाला बजट कहां जा रहा है, इसकी जानकारी जिला प्राबेशन विभाग के पास नहीं है।

यह सही है कि बाल कल्याण समिति का संचालन सालभर बाद भी सही ढंग से शुरू नहीं हो सका है। जल्द ही समिति को दफ्तर मुहैया कराने और उसे सक्रिय करने की कोशिश नए सिरे से शुरू की जाएंगी।
एसएस यादव, कार्यवाहक जिला प्राबेशन अधिकारी
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