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पहले बिकेगी पुराने रेट की खाद

Badaun

Updated Sat, 07 Jul 2012 12:00 PM IST
बदायूं। खाद के नए रेट लागू होने के बाद पुराने रेट की पहले से भंडारित करीब 14 हजार मीट्रिक टन (एमटी) खाद की ओवररेटिंग रोकने के लिए तैयारी कर ली गई है। इसके लिए यह फरमान जारी किया गया है कि बफर गोदाम में मौजूद पहले से भंडारित खाद पूरी तरह नहीं बिक जाती, सहकारी समितियों को नए रेट वाली खाद की आपूर्ति नहीं की जा जाएगी। इसके बावजूद प्रशासन को ओवररेटिंग को रोकने के लिए खुद अपने स्तर से भी कड़ी निगरानी की व्यवस्था बनानी होगी।
खाद के नए रेट लागू हो चुके हैं। डीएपी और एपीके के प्रति कट्टे में नए दाम में करीब तीन सौ रुपये का इजाफा हो गया है। जबकि जिले में पुराने रेट की करीब 14 हजार एमटी बफर गोदाम में रखी हुई है। नए रेट लागू होने के बाद इस खाद की अगर ओवररेटिंग हुई तो इस खेल में लाखों के वारे-न्यारे हो सकते हैं। इस पर लगाम कसने के लिए शासन ने फरमान जारी किया है। कृषि निदेशक डॉ मुकेश गौतम ने यह निर्देशित किया है कि जिले में पहले पूर्व भंडारण की रखी हुई खाद की आपूर्ति समितियों को की जाएगी। यह पुराने रेट पर ही बिकेगी। पुराने स्टॉक जब बिलकुल सिफर हो जाएगा तो उसके बाद ही खाद के नए रेट का स्टाक जारी किया जाएगा। हालांकि इस व्यवस्था से खाद की पूरी तरह ओवररेटिंग रुकना तो तय नहीं है, लिहाजा प्रशासन को इस बार सहकारी समितियों पर होने वाली खाद की बिक्री पर और कड़ी निगरानी रखनी होगी।
यहां भी फंस सकता है पेच
कृषि निदेशक ने भले ही पहले की भंडारित खाद पुराने रेट पर बेंचने का निर्देश जारी कर दिया हो लेकिन पेच यहां फंस रहा है कि बफर गोदाम पर पुराना स्टॉक भले सिफर हो जाए लेकिन सहकारी समितियां काफी मात्रा में अपने यहां यह खाद बिक्री करने से रोके रहे। बाद में जारी होने वाली नए रेट की खाद के साथ पुराने स्टॉक की खाद की बिक्री कर वे गोलमाल करने में कामयाब रहे। हालांकि किसानों को सजगता यह बरतने की जरूरत है कि वह खाद के कट्टे पर पड़े दाम से ही उसकी खरीद करें।

कैश मेमो न जारी करने में भी होता है खेल
सहकारी समितियों पर खाद की बिक्री के समय किसानों को कैश मेमो जारी होना चाहिए, जिसमें खाद की मात्रा और बिक्री रेट का साफ उल्लेख हो। जबकि ज्यादातर सहकारी समितियां खाद खरीदने वालों को कैश मेमो ही नहीं देती, जिससे यह साफ नहीं हो पाता कि खाद की बिक्री किस रेट पर की गई है। इससे भी खाद की ओवररेटिंग काफी बड़े मात्रा में हो जाती है। कम पढ़ा लिखा या अशिक्षित किसान जागरुक न होने से ज्यादा दाम वसूल लिए जाते हैं।

खाद की ओवर रेटिंग किसी भी हालत में नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए कड़ी निगरानी व्यवस्था बनाई जाएगी। किसान भी कट्टे पर पड़े मूल्य को देखकर भुगतान करें।
नरेंद्र कुमार, सहायक निबंधक सहकारी समितियां
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