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बमनपुरा में छाया मातम, रामगंगा घाट पर हुई अंत्येष्टि

Badaun

Updated Tue, 03 Jul 2012 12:00 PM IST
दातागंज (बदायूं)। उत्तराखंड में ही पोस्टमार्टम के बाद रविवार की रात गांव बमनपुरा के दो सगे भाइयों समेत चार युवकों के शव गांव लाए गए, सोमवार की सुबह रामगंगा घाट पर सभी की अंत्येष्टि कर दी गई है। हादसे में चार अन्य युवक भी घायल हुए हैं। एक ही गांव के चार युवकों की मौत से वहां मातम का माहौल बना हुआ है।
थाना हजरतपुर क्षेत्र के गांव बमनपुरा निवासी ध्रुव सिंह का 25 वर्षीय पुत्र रामबहादुर और 22 वर्षीय नन्हूं के अलावा गांव के ही मुकुंदराम का 18 वर्षीय पुत्र टोई उर्फ टुइयां और ठाकुरदास का 35 वर्षीय पुत्र ब्रह्मानंद समेत गांव के आठ युवक 12 दिन पूर्व उत्तराखंड के बाजपुर में मजदूरी करने गए थे। यहां सभी युवक काशीपुर के इटौआ दाबका में रेत के खनन में लग गए थे। 30 जून की शाम सभी युवक रेत से भरे ट्रक के ऊपर बैठकर वापस लौट रहे थे। देर रात लगभग 11 बजे बाजपुर के पास ट्रक पलट गया, इससे ट्रक में सवार आठों युवक रेत में दब गए।
लगभग आधा घंटे बाद पहुंचे मजदूरों ने काफी मशक्कत के बाद सभी को बाहर निकाला लेकिन तब तक रामबहादुर, उसका भाई नन्हूं, टुइयां और ब्राह्मानंद की मौत हो चुकी थी। जबकि गांव के ही अमर सिंह, नन्हें, रामखिलावन और सुधीर घायल हो गए। इस घटना की सूचना मिलने के बाद परिवार केलोगों समेत गांव के दो दर्जन लोग घटनास्थल पर रात में ही पहुंच गए। दूसरे दिन रविवार को सभी शवों को पोस्टमार्टम के बाद देर रात परिवार के लोग गांव ले आए। साथ ही घायलों को भी घर लाया गया। सगे भाइयों समेत एक ही गांव केचार युवकों की मौत के बाद आसपास इलाके केहजारों लोग वमनपुरा पहुंच गए। सोमवार को रामगंगा के घाट पर शवों की अंत्येष्टि कर दी गई है।

पहले भी गई थीं तीन जानें
दो साल पूर्व गांव कुनिया के रामदास, जगदीश और हरिओम भी उत्तराखंड के किच्छा में खनन की मजदूरी करने गए थे। ठीक इसी तरह घर वापस लौटते समय ट्रक पलटने से तीनों की मौत हो गई थी।

तीन हजार की खातिर जोखिम में डालते हैं जान
हादसे में घायल अमर सिंह ने बताया कि 15 दिन में खनन की मजदूरी करके पांच हजार रुपये मिलते हैं लेकिन मजदूरी लगातार 12 घंटे करना पड़ती है। दो हजार रुपये वहां रहने- खाने और किराए में खर्च हो जाते है। ऐसे में घर लौटने पर महज तीन हजार रुपये ही बच पाते हैं। हाड़तोड़ मेहनत की वजह से 15 दिन से ज्यादा मजदूरी नहीं हो पाती।

हादसे में मरने वाले रामबहादुर की बीती 24 जून को शादी थी। बारात शाहजहांपुर के गांव कुड़रिया जानी थी। किन्हीं कारणों के चलते कन्यापक्ष के लोगों ने सर्दियों में शादी करने की बात कही थी। चूंकि घर में उसकी शादी की तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। विवाह संबंधी सभी सामान की खरीददारी भी की जा चुकी थी। सारा सामान संभालकर रख दिया गया था लेकिन शनिवार को रामबहादुर की मौत केसाथ ही मां-बाप के अरमान भी दम तोड़ गए। वहीं नन्हूं की मौत का गम भी उन्हें ताउम्र सालता रहेगा।
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