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अब सामने आया ग्राम सचिवालय निर्माण में घोटाला

Badaun

Updated Fri, 29 Jun 2012 12:00 PM IST
अनूप गुप्ता
बदायूं। करोड़ों रुपये खर्च बनवाए गए ग्राम सचिवालयों के निर्माण में घोटाला उजागर हुआ है। जिलेभर में बनवाए गए सचिवालयों का प्रशासन ने जब सत्यापन कराया है तो उसमें तमाम गड़बड़ियां सामने आयी है। किसी सचिवालय में प्लास्टर टूटा है तो कहीं दीवार में दरारें पड़ गई हैं। इससे यह तो साफ है कि सचिवालय बनवाने में मानकों की अनदेखी की गई है।
कार्यदायी संस्था यूपी प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन और यूपी श्रम व निर्माण सहकारी संघ ने जिले में 64 ग्राम सचिवालय बनाए थे। एक सचिवालय पर करीब 14 लाख रुपये खर्च तो कर दिए गए लेकिन उसका निर्माण कराने में गुणवत्ता का कोई ध्यान नहीं दिया गया। डीएम ने टीमें बनाकर जब इन ग्राम सचिवालयों का भौतिक सत्यापन कराया है तो उसमें तमाम गड़बड़ी और कमियां सामने आयी हैं। हालत यह है कि ग्राम सचिवालय में भले ही हाल में ही बनकर खड़े हुए हो लेकिन उनका प्लास्टर टूटने लगा है तो दीवारों में दरारें और बिजली की अधूरी फिटिंग से यह तो साफ है कि सचिवालय निर्माण में घोटालेबाजी की गई है। ऐसे में ज्यादातर सचिवालय अभी इस्तेमाल में नहीं लिए जा पा रहे हैं।

ये निकला नए बने ग्राम सचिवालयों का हाल-
म्याऊं ब्लाक के गौरामई में बने भवन में कई जगह प्लास्टर टूटा हुआ है। भाऊनगला में बनी बिल्ंिडग में लिंटर के ऊपर प्लास्टर चटक गया है। खिड़कियों में शीशे भी नहीं लगाए गए हैं। बिसौली ब्लाक के एतमादपुर में बने भवन का प्लास्टर कई जगह टूटा हुआ है। इसी गांव के बरौलिया में सचिवालय भवन की खिड़कियों का फाइबर उखड़ गया है। मदनजुड़ी में बने भवन की दीवार दरक गई है। प्लास्टर कार्य भी खराब पाया गया है। फर्श कई जगह टूटा है। दातागंज ब्लाक के वुनिया रयपुर में बने भवन में बिजली फिटिंग के पाइप टूटे हैं। मीटिंग हाल की बाहरी दीवार व छत के बीच दरार है। भगवानपुर में बने भवन में बिजली फिटिंग ही नहीं है। यही ज्यादातर अन्य सचिवालयों का भी है।

ग्राम सचिवालय के भवन को तलाशती रही टीम
बिसौली ब्लाक के करनपुर में यूपी श्रम एवं श्रम बरेली को ग्राम सचिवालय बनवाना था लेकिन जब मौके पर स्थलीय सत्यापन कराया गया है कि टीम यह देखकर दंग रह गई कि यहां सचिवालय भवन ही नहीं बना था। खुद ग्राम प्रधान प्रवेश कुमारी ने इसकी तस्दीक की।

ये था ग्राम सचिवालय बनाने का मकसद
शासन ने उन ग्राम पंचायतों में ग्राम सचिवालय बनाने का फैसला लिया था, जहां पंचायत भवन नहीं बने थे। पंचायत भवन के नए स्वरूप के तौर पर ग्राम सचिवालयों का खाका तैयार किया गया था। यहां ग्राम प्रधान, सचिव, रोजगार सेवक आदि के बैठने के लिए दफ्तर के साथ ग्राम पंचायत की बैठक के लिए मीटिंग हाल बनाया गया।
दोनों ही संस्थाओं ने नहीं दिया स्पष्टीकरण
ग्राम सचिवालय निर्माण में सरकारी रकम का दुरुपयोग व गड़बड़ी को लेकर सीडीओ सूर्यपाल गंगवार ने दोनों कार्यदायी संस्था यूपी श्रम व निर्माण सहकारी संघ और यूपी प्रोजेक्ट कोऑरपोरेशन के परियोजना प्रबंधकों से स्पष्टीकरण मांगा था, जो नहीं दिया गया है।

सत्यापन रिपोर्ट चौंकाने वाली है। अगर दोनों संस्थाओं ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया तो संस्था पर एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी।
सूर्यपाल गंगवार, सीडीओ
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