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समितियों के चुनाव से बाहर हो सकते हैं हजारों सदस्य

Badaun

Updated Wed, 27 Jun 2012 12:00 PM IST
अनूप गुप्ता
बदायूं। प्रारंभिक कृषि ऋण सहकारी समिति (पैक्स) के प्रबंध समिति के संचालक और सभापति व उपसभापति के चुनाव में हजारों सदस्य बाहर हो सकते हैं। नियम है कि समिति सदस्य, जिस पर छह माह से पुराना अगर कोई बकाया है तो वह मतदान नहीं कर सकेगा। जबकि समितियों के हजारों बकाएदारों पर तकरीबन 60 करोड़ से ज्यादा की वसूली बाकी है। लिहाजा ऐसे सदस्यों ने अगर जल्द बकाया जमा नहीं किया, तो वे मतदान के अधिकार से वंचित रह सकते हैं।
पैक्स समितियों का तीन साल का कार्यकाल खत्म हो रहा है। अगस्त में सात व आठ तारीख समिति संचालकों और सभापति व उपसभापति के चुनाव के निर्धारित हैं। जिले में 132 पैक्स समितियों काम कर रही हैं। इनके जरिए नगदी और खाद व कृषि उपकरण की खरीद के नाम पर समिति सदस्यों को करोड़ों रुपये का ऋण आवंटित किया जा चुका है। हालत यह है कि समितियों का सदस्यों पर करीब 78 करोड़ 90 लाख कुल बकाए में अभी तकरीबन 60 करोड़ की वसूली हजारों सदस्यों से करनी है। जबकि नियम यह है कि जिन सदस्यों पर छह माह से ज्यादा समय का बकाया है, तो वे मतदान में शामिल नहीं हो सकेंगे।

तकरीबन 48 हजार हैं पैक्स समिति सदस्य
जिले की सभी 132 पैक्स समितियों में कितने सदस्य हैं, इसकी जानकारी सहकारिता विभाग के पास फिलहाल नहीं है। हालांकि इसके लिए सभी समितियों को यह निर्देश जारी कर दिया गया है कि समितियों के कितने सदस्य सक्रिय हैं, इनके अलावा कितने सदस्य बकाएदार हैं। हालांकि इसी जनवरी में सहकारिता विभाग ने 48 हजार बकाएदारों का एक साल का बीमा कराया था। इस आधार पर सदस्यों की संख्या का आंकलन किया गया है।

मतदान के लिए दूसरों के कर्ज को बोझ उतारने की तैयारी
पैक्स समितियों के चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे उम्मीदवार उन सदस्यों को सूची तैयार कर रहे हैं, जिन पर बेहद कम बकाया है। वे इस रणनीति में है कि ऐसे लोगों का कर्ज खुद ही भरकर अपने वोटर बढ़ा सकें। हालांकि जिन पर काफी मोटी रकम बकाया है, उन्हें छूने की हिम्मत कोई नहीं कर पा रहा।

उत्पीड़न की कार्रवाई की रोक से बांधे हाथ पैर
छोटे बकाएदारों पर किसी तरह के उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगी है, जबकि समिति के ज्यादातर सदस्य छोटे बकाएदार ही हैं। ऐसे में विभाग चाहते न चाहते उन पर कोई सख्ती कर नहीं सकता, लिहाजा विभाग की वसूली की रफ्तार की बेहद धीमी है।

यह सही है कि समिति के पुराने बकाएदार चुनाव में शामिल नहीं हो सकेंगे। इसलिए उन्हें मतदाता की सूची में शामिल होने के लिए यह तस्दीक करानी होगी कि उन पर छह माह पुराना कोई बकाया नहीं है।
नरेंद्र कुमार, जिला सहायक निबंधक, सहकारी समितियां
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