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पहले 600 रुपये लाओ फिर जच्चा-बच्च पाओ

Badaun

Updated Fri, 15 Jun 2012 12:00 PM IST
बदायूं। जिला महिला अस्पताल में आए दिन कोई न कोई नया खेल होता है। कभी रुपये न देने के अभाव में बच्चे की मौत हो जाती है तो कभी दाइयों द्वारा घरों पर डिलीवरी कराई जाती है। अब एक नया मामला प्रकाश में आया है। बृहस्पतिवार को एक प्रसूता को रिलीव इसलिए नहीं किया गया कि उसके पारिवारीजनों ने नर्स, दाइयों को 600 रुपये नहीं दिए। परिवार के लोग सीएमओ डॉ. सुखबीर सिंह के पास पहुंचे, लेकिन वहां भी उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। काफी देर तक परिवारीजन अस्पताल में अपनी व्यथा बताने को भटकते रहे, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
कुंवरगांव क्षेत्र के गांव कसेर निवासी पीतांबर अपनी पत्नी नन्नी की डिलीवरी कराने बृहस्पतिवार की अल सुबह जिला महिला अस्पताल पहुंचे। पीतांबर का कहना है कि 50 रुपये भर्ती फीस के नाम पर लिए गए। उसके बाद 102 रुपये के इंजेक्शन सिंटोसिनान और एपीडोसिना मंगवाए। यह अस्पताल में नहीं थे। मेडिकल से खरीदकर लाए। आरोप है कि बच्चा सुबह लगभग दस बजे हुआ तो लगभग दो घंटे बाद प्रसूता के रिलीव को कहा तो उन्होंने 600 रुपये डिस्चार्ज के लिए मांगे। इसका विरोध किया तो रिलीव न करने की धमकी दी गई। उसके बाद मैं सीएमओ के पास पहुंचा, लेकिन वहां भी कोई राहत नहीं मिली। सीएमएस का इंतजार किया, लेकिन वह भी नहीं थी। पीतांबर की मां सोनवती का कहना है कि नर्स और एक दाई ने रकम मांगी है, बिना दिए रिलीव नहीं करने की बात कही है। गर्मी में यहां परेशान है। यही बात मुनेशपाल ने कही। कहा कि यहां कोई सुनने वाला नहीं है। यहां तो जच्चा-बच्चा को रिलीव कराने के नाम पर 600 रुपये मांगे जा रहे हैं। इस संबंध में सीएमएस रेखा रानी से संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव कर स्वीच ऑफ कर लिया।

शिकायतकर्ता मेरे पास आए थे। मैंने उनका समझाया कि महिला सीएमएस से अपनी बात जाकर कहें तो वह चले गए थे। उसके बाद वह नहीं आए। समस्या का समाधान हो गया था। -डॉ. सुखबीर सिंह, सीएमओ

क्या है नियम
डिलीवरी के लिए महिला को भर्ती करने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। दवाएं भी निशुल्क अस्पताल प्रशासन मुहैया कराता है। बच्चा जब जन्म लेता है तो चिकित्सक प्रसूता को 24 घंटे अस्पताल में रखने की सलाह देते हैं ताकि उन्हें बाद में कोई खतरा न हो, हालांकि परिवारीजन चाहें तो इस अवधि से पहले भी ले जा सकते हैं।
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