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गरीबों के रोजगार का सहारा बनी मनरेगा कंगाल

Badaun

Updated Fri, 15 Jun 2012 12:00 PM IST
बदायूं। हजारों मजदूरों को काम देने वाली मनरेगा इन दिनों खुद ही पाई-पाई की मोहताज है। ज्यादातर ग्राम पंचायतों में या तो काम ठप है या फिर जहां थोड़ी-बहुत रकम है भी, वहां छोटे-मोटे ही काम चल पा रहे हैं। इधर, शासन से अभी मनरेगा का पर्याप्त बजट न उपलब्ध हो पाने से बाद में वित्तीय साल के काम समय से पूरा करने में भी खासी परेशानी होगी।
सूबे की सत्ता बदलने के साथ स्थानांतरण सहित अन्य उथल-पुथल के बीच एक तो मनरेगा का नया बजट प्रस्ताव तैयार करने में ही काफी विलंब हो गया। इसी बीच, पिछले साल का अवशेष करीब 20 करोड़ से काम चलाने की कोशिश की गई। इधर, प्रशासन ने 105 करोड़ का नए वित्तीय साल का बजट बनाकर भेज दिया। समय से मनरेगा को पैसा जारी न हो पाने के कारण ज्यादातर ग्राम पंचायतों में धन का अकाल है। कुछ ग्राम पंचायतों में थोड़ा-बहुत बजट है भी, तो उससे छोटे-मोटे ही काम ही कराए जा पा रहे हैं। अभी शासन समय से मनरेगा का बजट जारी करने में देरी कर रहा है। बाद में इस वित्तीय साल के काम समय से पूरा कराने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।

ग्राम पंचायतों की ये है हालत
उझानी ब्लाक की 29 ग्राम पंचायतों में नाम मात्र को बजट है। ऐसे में यहां मनरेगा का काम ठप है। इसके अलावा 25 ऐसी ग्राम पंचायतें हैं, जहां 70 से एक लाख रुपये तक ही धनराशि है, ऐसे में यहां छोटे-मोटे ही काम कराए जा पा रहे हैं। इसके अलावा कादरचौक ब्लाक की ज्यादातर ग्राम पंचायतों का भी यही हाल है। यहां 47 ग्राम पंचायतों में 20 से 50 हजार रुपये से ज्यादा किसी के पास नहीं है। जबकि इस धनराशि से बेहद छोटी कार्य के अलावा कोई बड़ी कार्ययोजना करा पाना मुमकिन नहीं है। यही हाल जिले की अन्य ग्राम पंचायतों की है।

फर्जी काम न पकड़े जाने से अफसर खुद शक के दायरे में
ग्राम पंचायत में ज्यादातर प्रधान जी के चहेते जॉबकार्डधारकों के नाम मस्टर रोल पर दर्ज कर मजदूरी वसूल कर ली जाती है। जबकि मस्टर रोल पर जितनी इंट्री दर्ज होती है, कार्यस्थल पर मजदूरों की संख्या उससे कहीं कम होती है। इस तरह के फर्जीवाड़े से मनरेगा में घपलेबाजी का बड़ा खेल चल रहा है, जबकि ऐसे मामलों के खुलासे में मनरेगा से जुड़े अधिकारी नहीं कर रहे। ऐसे में इस गोलमाल में उनकी भी भूमिका शक के दायरे में है।

यह सही है कि मनरेगा में बजट की कमी से काम प्रभावित हुआ है लेकिन हाल ही में जिले को 11 करोड़ मिल जाने से कुछ राहत मिली है।
कृपाशंकर राम, पीडी, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण
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