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पुलिस और नेताओं के गठजोड़ के आगे घुटने टेकना पड़ा

Badaun

Updated Wed, 06 Jun 2012 12:00 PM IST
अभिषेक सक्सेना
बदायूं। गांव के प्रधान जिनके यहां तमाम ग्रामीणों की समस्याओं का निस्तारण होना चाहिए वही प्रधान पुलिस और नेताओं के गठजोड़ के आगे घुटने टेक दिया। बकौल तालगांव के प्रधान इकरार यदि मैं पलायन न करता तो जान बचाने के लाले पड़ जाते। बीती हफ्ते जब दबंगों ने मां-बाप समेत मुझे बंधक बनाया और पीटा तब कानून के सहारे सुरक्षा की उम्मीद लेकर थाने पहुंचा तो दबंग पहले से ही कुर्सी पर बैठे हुए थे। मेरी तहरीर थानेदार पढ़ भी न पाए थे कि तभी सत्ताधारी दल के एक नेता का फोन आया और कहा कि प्रधान के मामले को रफादफा कर दो। इसके बाद थानेदार के बोलने का अंदाज और बदल गया। तहरीर के आधार पर मारपीट और बलवे का मुकदमा न जाने क्या सोचकर पुलिस ने दर्ज कर लिया पर एक दर्जन दबंगों को मुचलकों पर छोड़ दिया।
प्रधान इकरार के मुताबिक थाना मूसाझाग के तालगांव का झगड़ा थाने पहुंचा और दबंग साथ-साथ फिर गांव लौटे तो जान से मारने की धमकी दे डाले। जब कोई उपाय नहीं सूझा तो पलायन की योजना बनाने लगा। मंगलवार को उसी योजना के तहत ट्रकों और अन्य वाहनों पर गृहस्थी का सामान लेकर चला गया। साथ में घर के ही नौ लोगों का परिवार भी गांव छोड़ दिया। कहां गए हैं यह इसलिए नहीं बताया जा सकता है क्योंकि दबंग बहुत पहुंच वाले हैं। परिवार की जान बचाने के लिए अपने नए ठिकाने को छिपाए ही रखना बेहतर है।
इस घटना की नींव वर्ष 2010 केप्रधानी चुनाव के दौरान ही तब पड़ गई थी जब गांव के चौधरी परिवार के लोगों ने दूसरे व्यक्ति को चुनाव में उतारा वह हार गया बाद में उसकी सामान्य मृत्यु भी हो गई। इसकेबाद से यह दबंग दबाव बढ़ाते हुए चाह रहे थे कि प्रधानी उनके अनुसार ही की जाए। इसी मामले को लेकर कई बार लाठी-डंडे लेकर यह मेरे परिवार पर चढ़ते रहे। पिछले हफ्ते 31 मई को यह लोग धावा बोलकर मुझे तथा मेरे माता-पिता को उठा लिए। अपने घर में बंधक बनाकर पीटा और कहा कि प्रधानी करनी है तो हमारे अनुसार अन्यथा छोड़ दो।
पुलिस प्रशासन में सुनवाई न होने के बाद उम्मीद थी कि जनप्रतिनिधि सुनेंगे लेकिन वह तो पहले ही दबंगों से मिल गए थे। एक ही संप्रदाय के यह दबंग गांव में निरंतर तनाव बनाए हुए थे फिर भी पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। हैरत की बात को तब हुई जब ग्राम प्रधान खुद के अलावा नौ परिवारों समेत पलायन कर रहे थे तो पुलिस वाले भी दबंगों के साथ खुश नजर आ रहे थे। अपने ही महकमे की पुलिस अधीक्षक तक को उन्होंने जानकारी नहीं दी। अमर उजाला प्रतिनिधि ने जब पूछा तो एसपी मंजिल सैनी ने कहा कि उन्हें घटना की जानकारी नहीं है, वैसे भी कोई खास बात नहीं है जांच कराने पर ही स्थिति स्पष्ट होगी। अलबत्ता डीएम मयूर माहेश्वरी ने इस मामले को गंभीर माना और कहा कि प्रधान और उनके कुनबों को सुरक्षा दिलाई जाएगी। मामले की जांच में दोषियों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे।
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