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गुप्ता नर्सिंग होम के संचालकों को डीएम की नोटिस

Badaun

Updated Fri, 18 May 2012 12:00 PM IST
बदायूं। कन्या भ्रूण हत्या के मामले में जिला प्रशासन गंभीर हो गया है। स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर मिली कमियों का जवाब देने को गुप्ता मैटरनिटी एवं नर्सिंग होम के संचालकों को जिलाधिकारी ने नोटिस जारी किया है। इसमें उन्होंने छह बिंदुओं पर सात दिन के भीतर जवाब मांगा है। इसमें कहा गया है कि साक्ष्य के रूप में शिकायतकर्ता से मिली सीडी देखने पर प्रतीत होता है कि लिंग भ्रूण की जांच और हत्या की गई है। इसके तहत प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम का उल्लंघन हुआ है।
विदित हो कि बीते 28 अप्रैल को इसी नर्सिंग होम के संचालकों के खिलाफ अधिवक्ता गजेंद्र प्रताप सिंह के प्रार्थना पत्र पर सीजेएम न्यायालय में मुकदमा (परिवाद) स्वीकार किया गया है। इस मामले को अमर उजाला ने छह मई के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके तीसरे दिन स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इस निजी अस्पताल पर छापा मारकर अल्ट्रासाउंड आदि की जांच की थी। वही रिपोर्ट सीएमओ डॉ. सुखबीर सिंह ने जिलाधिकारी मयूर माहेश्वरी के समक्ष प्रस्तुत की थी। उसी आधार पर डीएम ने छह बिंदुओं पर अस्पताल संचालकों डॉ. सुरेश चंद्र गुप्ता/डॉ. सुनीती गुप्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
ये रहे नोटिस के छह बिंदु
-17 मई की तिथि में पत्रांक संख्या 175 से जारी नोटिस में कहा गया है कि संयुक्त जांच टीम ने जब अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट से संबंधित अभिलेख मांगे तो पाया गया कि अल्ट्रासाउंड कराने आए लोगों का पूरा पता तथा फोन नंबर अंकित नहीं थे। जबकि अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ऐसा करना आवश्यक है। अत: यह धारा पांच और छह का उल्लंघन है।
-अधिकांश मरीजों की रेफरल स्लिप उपलब्ध नहीं थी। आपने खुद अल्ट्रासाउंड कराने के लिए फार्म एफ तथा एएनसी रजिस्टर पर लिखा था।
-फार्म एफ पर अल्ट्रासाउंड जांच कराने की वजह नहीं दी गई थी। जांच रिपोर्ट के परिणाम में कोई बीमारी या सामान्य जैसी कोई आख्या नहीं लिखी गई थी।
-आपके पास विगत दो वर्षों का आवश्यक रिकार्ड उपलब्ध नहीं था जबकि अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार रिकार्ड दो वर्ष तक सुरक्षित रखना आपकी जिम्मेदारी है।
-आपके अल्ट्रासाउंड केंद्र पर पीसीपीएनडीटी अधिनियम उपलब्ध नहीं था।
- सीडी देखने पर प्रतीत होता है कि आपने भ्रूण लिंग की जांच की व डॉ. सुनीती गुप्ता ने लिंग चयन एवं भ्रूण हत्या के लिए प्रेरित किया। डॉ. सुरेश चंद्र गुप्ता तथा डॉ. सुनीती गुप्ता लिंग चयन एवं कन्या भ्रूण हत्या में संलिप्त हैं।
-उपरोक्त पाई गई कमियों से स्पष्ट है कि आपने प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम (पीसीपीएनडीटी) 1994 के नियमों में दिए गए प्रावधानों का सीधा उल्लंघन किया है। अत: सात दिन के अंदर कारण स्पष्ट करें कि ऐसा क्यों किया गया? क्यों न आपके विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्यवाही की जाए?
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