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सीबीआई की कार्रवाई से जगी न्याय की उम्मीद

Badaun

Updated Fri, 04 May 2012 12:00 PM IST
बदायूं। मुकुल गुप्ता फर्जी एनकाउंटर मामले में सीबीआई जांच के बाद एक सिपाही की गिरफ्तारी और रिमांड पर लेने के बाद मुकुल के परिवार के लोगों में चार साल बाद न्याय की उम्मीद जगी है। परिवार के लोगों का मानना है कि रिमांड की अवधि के दौरान हुई पूछताछ में सिपाही सच उगल देगा और उनके बेटे की हत्या करने वाली पुलिस टीम केखिलाफ कार्रवाई भी होगी।
ये था मामला
विदित हो कि शहर के मोहल्ला ब्राह्मपुर निवासी वीके गुप्ता पीडब्ल्यूडी से सेवानिवृत्त इंजीनियर हैं। उनके 28 वर्षीय पुत्र मुकुल गुप्ता दवाइयों का कारोबार करते थे। चूंकि कारोबार बरेली से जुड़ा था। ऐसे में मुकुल ने संजयनगर में एक घर किराए पर लिया था। यहां वह अक्सर ठहरते थे। 30 जून 2007 को बरेली के थाना फतेहगंज क्षेत्र के अंतर्गत रबर फैक्ट्री के पास स्थित रेलवे लाइन के निकट ट्रेनी एएसपी जे रवींद्र के नेतृत्व में 11 सदस्यीय पुलिस टीम ने मुकुल को गोली मार दी थी। पुलिस का दावा था कि मुकुल लूटपाट करने वाले गिरोह का सदस्य थे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने शक को भरोसे में बदला
मुकुल के पिता श्री गुप्ता ने बताया कि उन्हें पूरा भरोसा था कि उनका पुत्र आपराधिक गतिविधियों में लिप्त नहीं हो सकता लेकिन पुलिस की इस सूचना ने उन्हें असमंजस में डाल दिया। मुकुल के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके सिर में दो गोलियां निकली थीं। इस पर उन्हें पूरा भरोसा हो गया कि पुलिस ने उसकी जानबूझकर हत्या की है। क्योंकि एनकाउंटर में पुलिस किसी भी अपराधी के सिर में दो गोलियां नहीं मारती।
पुलिस ने दिखाई पूरी कारगुजारी
एनकाउंटर के बाद मुकुल के पिता ने मानवाधिकार समेत कई संस्थाओं की मदद ली। बाद में कोर्ट के आदेश पर ट्रेनी एएसपी समेत पूरी टीम के खिलाफ षडयंत्र के तहत हत्या कर सबूत छिपाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था लेकिन बरेली पुलिस ने इस मामले में पूरी कारगुजारी दिखाई और जांच में पुलिस टीम को क्लीन चिट दे दी। इस पर पीड़ित पिता न्याय की आस में उच्च न्यायालय पहुंचे, इस गंभीर मामले को हाइकोर्ट ने 26 फरवरी 2010 को सीबीआई को सौंप दिया था।
कारतूस फोड़ेगे पुलिस के पाप का घड़ा
सीबीआई ने बरेली के जगवीर सिंह नाम के सिपाही को रिमांड पर लिया है। खास बात यह है कि मुकुल केपिता की ओर से दर्ज मुकदमे में नामजद पुलिस टीम में इस सिपाही का नाम शामिल नहीं है। वहीं सीबीआई ने उसे इस आधार पर रिमांड पर लिया है कि मुकुल को लगी गोली ट्रेनी एसपी के गनर की राइफल से नहीं बल्कि जगवीर की राइफल से चली है। ऐसे में वही कारतूस अब पुलिस के पाप का घड़ा फोड़ने का काम करेगा।
सीबीआई अब खोल देगी राज : गुप्ता
मुकुल के पिता वीके गुप्ता कहते हैं कि सीबीआई द्वारा इस सिपाही की गिरफ्तारी और रिमांड के बाद उन्हें पांच साल बाद न्याय की उम्मीद जगी है। उनका कहना है कि उन्हें विश्वास है कि सीबीआई इस मामले को परत दर परत खोलकर सच सभी केसामने रख देगी तभी उन्हें शांति मिलेगी।
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